छू लें आसमान – मीत अग्रवाल

हर परिंदें हैं जमीं के
पंख जो फडफ़ड़ाएं ताकत से
छू लेंगे रंग आसमां के
ऑल राउंडर शब्द के पर्याय बन चुके मीत उन बच्चों की कतार में खड़े हैं जो बहुमुखी प्रतिभाशाली होते हैं. लेकिन मीत सिर्फ बहुमुखी प्रतिभाशाली ही नहीं है वरन उन्होंने उन सभी क्षेत्रों में अपनी सफलता के झंडे भी लहराए हैं.
मात्र एक वर्ष की आयु से हारमोनियम बजाने वाले मीत अग्रवाल ने हाल ही में जून 2015 की सीए सीपीटी परीक्षा में वेस्टर्न रीजन में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. आप सोच रहे होंगे हारमोनियम और सीपीटी का आपस में क्या संबंध है? जी हां ! कोई संबंध नहीं, किंतु संगीत, खेल और पढ़ाई का गहरा संबंध है मीत से. मीत ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की है. मीत के पिता तरूण अग्रवाल व्यवसायी हैं और मां एक कोरियोग्राफर.
सत्रह वर्षीय मीत अग्रवाल ने विभिन्न क्षेत्रों की ढेरों उपलब्धियां अपने नाम कर रखी है. उनकी आयु से ज्यादा उनके अवॉर्ड और ट्रॉफियां उनके घर की अलमारी में सजे हुए हैं.मीत को एशियाड और राष्ट्रमंडल जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में शतरंज प्रतियोगिता के लिए चुना गया और उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दस सदस्यी दल में अपना स्थान बनाया.
बचपन से ही संगीत का शौक रखने वाले मीत अग्रवाल ने भारतीय और पश्चिमी संगीत की शिक्षा प्राप्त की है.2007 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और आरएचआर वर्ल्ड रिकॉर्ड में केवल सात मिनट में सबसे ज्यादा संगीत के वाद्ययंत्र (सैंतालिस) बजाने का खिताब भी मीत के नाम पर दर्ज है. यही नहीं मीत ने सोनी चैनल पर आने वाले एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा में भाग लिया, इस शो के निर्णायक संगीतकार अनुमलिक मीत की प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मीत को नन्हें रहमान की उपाधि दे डाली. मीत ने जी टीवी के शाबाश इंडिया शो में भी भाग लिया. यही नहीं मीत की संगीत प्रतिभा पर नन्हा जादूगर नाम से एक वृतचित्र बनाया गया. जिसे टीवी के विभिन्न समाचार चैनलों पर प्रदर्षित किया जा चुका है.

मीत बताते हैं इन सभी उपलब्धियों को हासिल करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है.खेलों में भी मीत की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं. उन्होंने टेबल टेनिस में राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात का प्रतिनिधित्व किया है.
स्केटिंग में भी वे स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं. मीत टूर्नामेंट और शो के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं परंतु इस व्यस्तता का प्रभाव उन्होंने पढ़ाई पर नहीं आने दिया है.बस व ट्रेन के सफर में पढक़र वे कक्षा में अव्वल आते रहे हैं. बारहवीं वाणिज्य वर्ग में 97.2 प्रतिशत अंकों के साथ उन्होंने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में योग्यता सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया.
मन्चूरियन खाने के शौकीन मीत भविष्य में एक सफल व्यवसायी बनने की इच्छा रखते हैं. मीत बताते हैं कि उनकी मां ही उनकी प्रेरणा हैं. खाली वक्त मीत संगीत की नई धुनें बनाकर बिताते हैं.
व्यस्तता मानव विकास के लिए जरूरी है और माता पिता का सही मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किसी भी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आवश्यक है.मीत को उनके उज्जवल भविष्य के लिए महक की और से ढेरो शुभकामनायें  देते  हुए उनसे बातचीत समाप्त की और विदा ली.
 गरिमा सिंह

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