चिलचिलाती कड़क धूप व गर्मी के दिनों में अपनी ओर आकर्षित करते तरबूज

चिलचिलाती कड़क धूप व गर्मी के दिनों में लाल-लाल कटे हुए तरबूज बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

तरबूज एक ऐसा फल है जो यूं तो वर्ष भर आता है पर गर्मियों का यह मौसमी फल है. ऊपर से दिखने में सामान्य हरे रंग का और अंदर से लाल गूदे वाला, स्वाद में मीठा और प्यास बुझाने वाला तरबूज एक ऐसा फल है जो गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है.

रोग प्रतिरोधक एंटी ऑक्सिडेंट और लाइकोपिन तरबूज में बहुतायत से पाया जाता है. तरबूज बहुत सी बीमारियों जैसे हृदय रोग, मधुमेह से बचाता है. तरबूज में 12 प्रतिशत पानी व 6 प्रतिशत शर्करा होती है, साथ ही यह विमाटीन-ए, सी व बी का भी एक बड़ा ोत है. इसके अतिरिक्त तरबूज में बीटा कैरोटिन नामक तत्व भी पाया जाता है जो हृदय रोग से बचाव करने के लिए फायदेमंद है.

तरबूज खाने के फायदे-

यदि आप सालों साल जवां दिखना चाहते हैं तो खूब तरबूज खाएं, इसमें पाया जाने वाला लाइपिन त्वचा को जवान व खूबसूरत बनाता है.

विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में तथा विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होता है और ये दोनों तत्व तरबूज में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं.

-तरबूज के बीज पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं.

– तरबूज पर काली मिर्च व काला नमक छिड़ककर खाने से भोजन की पाचन क्रिया संतुलित हो जाती है साथ ही खट्टी डकारें आना बंद हो जाता है.

– तरबूज का गूदा चेहरे पर रगडऩे से ब्लैक हैड्स निकल जाते हैं और चेहरे का रंग भी निखरता है.

ध्यान रखने योग्य सावधानी

– तरबूज खा कर कभी भी तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए. कोशिश करनी चाहिए कि एक घंटे तक पानी नहीं पीएं,वरना स्वास्थ्य को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

रंग बिरंगे तरबूज

आजकल बाजार में कई प्रकार के रंग और आकार के तरबूज आते हैं. गहरा हरा गोल तरबूज, जो कि नदी के पानी में उगाते हैं, पट्टे वाला हल्के रंग का तरबूज खेतों में उगाया जाता हैं. इसे कलिंगर और बैंगलोरी भी कहते हैं, गहरे हरे रंग व आकार में लम्बे रंग के तरबूज को लमगोड़ भी कहते हैं.

पीले रंग के तरबूज को अमेरिकन तरबूज के नाम से जाना जाता है. यह अन्दर से गुलाबी रंग का होता हैं तथा इसकी छाल पतली होती है.

स्वाद

यूं तो स्वाद में सभी तरबूज मीठे होते हैं परंतु दुकानदार बताते हैं कि कलिंगर ज्यादा मीठे व सेहतपूर्ण होते हैं. इनकी मांग भी ज्यादा है.

तरबूज सूरत में

गर्मियों में सूरत में हर गली, नुक्कड़ व चौराहे पर सड़कों के किनारे आपको तरबूज बेचने वाले दुकानदार व लेने वाले लेनदार नजर आएंगे.

अडाजन स्थित दुकानदार नइम शेख बताते हैं सूरत में तरबूज की बड़ी संख्या में मांग है यहां ज्यादातर तरबूज छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, राजस्थान से आते हैं. सूरत मंडी में रोजाना लगभग 18-20 गाड़ी तरबूज की आती हैं और हर गाड़ी में लगभग 10 टन माल होता है.

उधना तीन रास्ते पर स्थित तरबूज के दुकानदार मलिक मोहम्मद मुबारक बताते हैं कि पीला तरबूज थोक में सिर्फ वहीं रखते हैं और ये वो दिल्ली के पास स्थित बिजनौर शहर से मंगवाते हैं. यहां तरबूज की प्लेट खा रहे धवल हसमुख पटेल कहते हैं कि जब भी काम करते -करते भूख प्यास लगती है तो सीधा तरबूज वाले के पास जाकर एक डिश तरबूज बनवाकर खा लेता हूंï. एक स्टाल पर तरबूज खरीद रहे पंचाल डोडिया को गर्मी में ये सबसे अच्छा फल लगता है. घर पर ही नहीं दोस्तों के यहां जाने पर भी वे इसी की मांग करते हैं.

खुश्बू सूरती कहते हैं कि वजïन कम करते समय पेट भरने का सबसे अच्छा साधन है कितना भी खाओ शरीर फैलता ही नहीं है.

व्यंजन तरबूज के

सामान्यत: तरबूज से फ्रूट सलाद, जूस, स्मूदी आदि घर में बनाए जाते हैं, इस बार कुछ ऐसा व्यंजन बनाने की विधि लेकर हम आए हैं जिससे आपकी तारीफ में चार चांद लग जाएंगे.

राजस्थानी वाटरमेलन करी
सामग्री- 2 किग्रा. बीजरहित तरबूज, 2 छोटी चम्मच पिसी हुई लाल मिर्च, 2 छोटी चम्मच हल्दी, 1 छोटी चम्मच साबुत धनिया, 1 छोटी चम्मच अदरक कसा हुआ, 3 बड़ी चम्मच तेल, आधा चम्मच जीरा पाउडर, आधा चम्मच राई, नमक व शक्कर स्वादानुसार, नींबू का रस स्वादानुसार.

विधि- तरबूज के बड़े चौकार टुकड़े काटें, 1 कप तरबूज को मिक्सी में पीस लें, छानकर गूदे को अलग कर दें, निकले हुए जूस में मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, अदरक व धनियां पाउडर मिलाएं. कढ़ाही में तेल गर्म करें, जीरा व राई का तड़का लगाएं, जैसे ही वह चटकने लगे 5-10 सेकंड के अंदर उसमें तरबूज का जूस डाल दें. आंच को कम करें, तब तक पकने दें जब तक कि मात्रा आधी न हो जाएं, नमक व चीनी स्वादानुसार मिलाएं, कटे हुए तरबूज के टुकड़े इसमें डालेï. 2-3 मिनट तक पकाएं. नींबू का रस मिलाकर सर्व करें.

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