गुलमोहर जिंदगी

गुलमोहर जिंदगी
गुलमोहर जिंदगी


ज़िंदगी गुलमोहर के फूलों जैसी . 

कभी लाल चटक तो कभी बासंती पीली,
कभी खिली खिली , कभी उदास उदास,
बारिश की बूंदों सी खुद में सिमटती,
आँखों से उदासी , चेहरे से खुशी बरसाती,
ज़िंदगी गुलमोहर के फूलों जैसी.
कभी उजली, कभी धुंधली, 
कभी बुझती, कभी जलती ,
सीप में मोती जैसी,
पंखुरी की ओस जैसी,
ज़िंदगी गुलमोहर के फूलों जैसी .
 कभी खामोश तो कभी अठखेलियां भरती,
कभी खुद से तो कभी दुनिया से नाराज, 
कभी सर्द हवा सी, कभी धूप सी खिलती,
 अमियाँ सी खट्टी , रसभरी सी मीठी
ज़िंदगी गुलमोहर के फूलों जैसी .
बादलों सी उड़ती , कहीं बरसती, 
दामिनी सी चमकती ,कहीं जलती,
खुद में उलझी , खुद से सुलझी,
मुस्करा ले फिर से जिंदगी,
जिंदगी गुलमोहर के फूलों जैसी.


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