गीता गोपाल पंजाबी

श्रृंगार का रचनात्मकता से सीधा संबंध है. सृजन और ऊर्जा का समन्वय है रचनात्मकता. रचनात्मकता से भरपूर, श्रृंगार की आवश्यकता ,ज्वेलरी डिजाइनिंग जैसे अपने शौक को अपना मकसद बनाया और अपनी मेहनत व लगन से इसमें कामयाबी हासिल की है गीता गोपाल पंजाबी ने.

गीता गोपाल गृहिणी होने के साथ शिक्षिका भी हैं और एक कोचिंग सेंटर की संचालिका हैं. इनके पिताजी मुंबई में घडिय़ों के व्यवसाय से जुड़े हैं माता गृहिणी हैं. सात भाई बहनों में चौथे स्थान की गीता ने विवाह पूर्व स्नातक व बीएड किया है. इनका विवाह गोपाल चंद्र पंजाबी से हुआ जो कि कपड़ा व्यवसाय का कार्य करते हैं.

गीताजी को आर्टिफिशियल गहने बनाने का शौक बचपन से ही था. विद्यालय शिक्षण के दौरान इन्होंने इसका शॉर्ट टर्म कोर्स भी किया था. किंतु पढ़ाई के कारण वे अपने शौक को व्यवसाय नहीं बना सकी.ï विवाह के पश्चात वे शिक्षिका बन गई और नौकरी के साथ घर भी संभालने लगीं. लेकिन गहनों में डिजाइनिंग का शौक उनके मन में रचा बसा रहाï. गीता के पति को इसकी जानकारी होने पर उन्होंने गीता को इस क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया. प्रारंभ में उन्हें इसमें असफलता का सामना करना पड़ा. लेकिन कुछ वर्षों के पश्चात चेन्नई में रहने वाली उनकी भतीजी जिसने गीता जी से ही गहने बनाने सीखे थे और सफल व्यवसाय कर रही थी, से प्रेरित होकर उन्होंने फिर से इस कार्य को प्रारंभ किया. इसके लिए उन्होंने अपने आपको ग्राहकों को सीधा जोड़ा और सूरत में लगने वाली प्रदर्शनियों में अपने स्टॉल लगाना शुरू किया. धीरे धीरे उनके काम को पहचान मिलने लगी और सफलता की शुरूआत हुई. आज उनके पास न केवल ढेरों ऑर्डर हैं बल्कि सीखने वालों की कतार लगी हुई है.

इस सबके साथ वे परिवार को भी पूरा समय देती हैं. विशेष तौर पर किशोरावस्था में पहुंच चुकी अपनी बेटी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने का प्रयास करती हैं.गीता का मानना है कि लड़कियों की शिक्षा स्वस्थ परिवार के विकास के लिए अत्यावश्यक है. सुबह छह बजे से रात्रि दस बजे तक परिवार व कार्य में व्यस्त रहने वाली गीता जी आज भी ऊर्जावान हैं. वे महिलाओं को परिवार के दैनिïक कार्यों के अतिरिक्त अर्थोपार्जन के लिए कुछ न कुछ न कुछ कार्य करने की सलाह देती हैं. वे कहती हैं इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है. गीता बताती र्है प्रत्येक दिन खत्म होने पर उन्हें अपने किए गए कार्यों से संतुष्टि मिलती है और अगले दिन वे नए कार्य के लिए प्रेरित होती हैं.

गीताजी के चेहरे का तेज व कार्य की ललक उन्हें सामान्य से विशेष बनाती हैं. उन्हें देखकर कोई भी प्रेरणा ले सकता है.

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