क्षय रोग : जानकारी और लक्षण

टेलीविजन पर एक विज्ञापन अक्सर दिखाई देता है जिसमें एक व्यक्ति को छींक या खांसी आने लगती है, वह उस पर कुछ पल नियंत्रण कर चेहरे पर रूमाल का प्रयोग करता है फिर खांसता है. यह विज्ञापन संक्रामक बीमारी फैलने देने से रोकने को प्रदर्शित करता है.

क्षय रोग जिसे आम बोलचाल की भाषा में टीबी कहा जाता है एक संक्रामक बीमारी है. यह एक आम परंतु अत्यधिक घातक बीमारी है.टीवी का मुख्य कारण टयूबर कुलेसिस नाम का माइक्रोबेक्टिरिया है.

टीबी के सामान्य लक्षण

टीबी के सामान्य लक्षणों की जानकारी रखने से टीबी के मरीज की पहचान करना आसान हो जाता है.

तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक खांसी का बना रहना.खांसते समय मुंह से खून आना.भूख कम लगना.शरीर का वजन अचानक से कम होने लगना.रात्रि के समय पसीना आना.शाम को बुखार का चढऩा, कमजोरी महसूस होना.एक माह से ज्यादा समय तक सीने में दर्द होना.गले के पास सूजन आना.यदि टीबी रीढ़ की हड्डियों में हुआ है तो पीठ में दर्द और पैरों में कमजोरी महसूस होना.

प्रभावित होने वाले अंग

सामान्य तौर पर टीबी फेफड़ों में होता है लेकिन ये पूरे शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है. बाल और नाखूनों के अतिरिक्त ये शरीर के प्रत्येक अंग को प्रभावित कर सकता है.

प्रसार

टीबी एक संक्रामक बीमारी है इसके कीटाणु हवा के माध्यम से फैलते हैं.जब टीबी का रोगी खांसता है या छींकता है या थूकता है तब उसके कीटाणु बाहर निकलते हैँ जो कि हवा में फैल जाते हैं. जब कोई अन्य स्वस्थ व्यक्ति उस हवा को सांस के द्वारा अंदर लेता है तब वे कीटाणु उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और वह व्यक्ति भी रोग ग्रसित हो जाता है.

बचाव

सर्वप्रथम टीबी के मरीज को सामान्य व्यक्ति से अलग रखने की व्यवस्था करें, जिससे उसके आस पास के दूसरे व्यक्ति संक्रमित न हों.सामान्य, स्वस्थ्य व्यक्ति को घर से बाहर एयर मॉस्क पहनकर निकलना चाहिए. ताकि वह टीबी ही नहीं बल्कि हवा से फैलने वाली अन्य संक्रामक बीमारियों से भी अपना बचाव कर सके.

पौष्टिक भोजन करे, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास हो. वह टीबी के कीटाणुओं का मुकाबला कर सकें. अवस्थाओं के आधार पर माइक्रोकेयर लैब के डॉ. धनजी राजानी ने बातचीत में टीबी के प्रकार के बारे में बताया. क्षय रोग मुख्यत: तीन प्रकार का होता है.

प्रथम- ये टीबी सामान्य प्रकार या प्रथम चरण होता है. जिसमें टीबी का कीटाणु शरीर में प्रवेश करता है इस बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव है. यदि रोगी अपनी दवाईयों को नियत समय पर ले, दवाई का पूरा कोर्स ले जो कि सामान्यत: 6 माह से 9 माह तकï का होता है. साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पोष्टिक एवं संपूर्ण भोजन ले.

द्वितीय- यह एमडीआर टीबी के नाम से जानी जाती है. यह टीवी की दूसरी अवस्था होती है.जब टीबी की प्रथम अवस्था में बीमारी का इलाज नहीं किया जाए तब यह अवस्था आती है. डॉ. धनजी बताते हैं कि कई बार जब टीबी की प्रथम अवस्था का उपचार चल रहा होता है तब थोड़ा ठीक होने पर व्यक्ति इसकी दवाईयां लेना बंद कर देता है. कोर्स पूरा नहीं करता है. ऐसी अवस्था में टीबी बिगड़ जाता है और शरीर में उसकी दवाईयों के प्रति प्रतिरोधकता बढ़ जाती है. जिससे टीबी की सामान्य या प्रथम चरण की दवाईयां मरीज पर असर करना बंद कर देती हैं. ऐसी स्थिति को मल्टी ड्रग रेसिसटेंस कहते हैं.

इस स्थिति में मरीज को ज्यादा दवाईयां और लंबे समय तक इसका नियमित कोर्स लेना होता है. इस स्थिति में मरीज के ठीक होने की काफी हद तक संभवाना होती है.

तृतीय -यह टीबी रोग की तीसरी और अंतिम अवस्था होती है. यह टीबी का सर्वाधिक बिगड़ा हुआ रूप होता है. यह एमडीआर का बिगड़ा हुआ रूप है. इसे एक्स डी आर एक्सटेंसिव ड्रग रेसिसटेंस के नाम से जाना जाता है. यह एक लाइलाज बीमारी है. इससे ग्रसित होने पर व्यक्ति की मृत्यु़ हो जाती है.

सावधानी बरतना और सही समय पर सही और पूरा इलाज़ लेना ही टीबी से बचने का सही तरीका है.

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