कैमरा..- बाल कहानी



राजू नट का खेल दिखाकर अपना जीवन काट रहा था उसके जीवन की एक ही इच्छा थी अपनी माँ के चेहरे पर मुस्कान लाना ….
क्या राजू इस कोशिश में कामयाब हो पाया…?

राजू अपनी मां के साथ मजदूरों की एक बस्ती जो कि शहर से बाहर बसी थी, में एक छोटे से घर में रहता था. राजू और उसकी मां बहुत गरीब थे. जीवन की गुजर बसर करने के लिए उसकी मां बड़े लोगों के घरों में काम करती थी, राजू सुबह के समय बस्ती के पास में बने सरकारी स्कूल में पढऩे जाता वह बहुत मन लगाकर पढ़ता था. शाम को वह बंजारों के साथ मिलकर नट के खतरनाक करतब दिखाता और कुछ पैसे कमाता. उसके जीवन की एक ही इच्छा थी अपनी मां के चेहरे पर मुस्कान देखना.

एक दिन की बात है राजू नट का खेल दिखाने में व्यस्त था तभी इन रोमांचक करतबों को देखकर वहां से गुजरते एक विदेशी सैलानी ने सभी की तस्वीरों के साथ उसकी तस्वीरें खींचीं. राजू ने देखा उस यंत्र (कैमरा) को देखकर लोग अपने आप रुक जाते हैं और उसके सामने जाकर मुस्कुराने लगते हैं. यह देखकर राजू आश्चर्य में पड़ गया कि डब्बे जैसे दिखने वाले इस यंत्र से लोग हंसते कैसे हैं?

अचानक राजू के मन में विचार आया कि अगर इस यंत्र (कैमरा) से सभी लोग हंस सकते हैं तो हमेशा उदास रहने वाली उसकी मां भी हंस सकती है.बस, उसी समय उसने उस यंत्र को खरीदने का निश्चय कर लिया.

एक दिन राजू बाजार से गुजर रहा था तभी उसने कबाड़ी की दुकान पर एक पुराना वहीं यंत्र लटके हुए देखा. उसने दुकानदार से उसका मूल्य पूछा, दुकानदार ने 200 रुपए बताया,राजू के पास उस समय 150 रुपए ही थे. राजू ने दुकानदार से उस कैमरे को किसी और को न बेचने का आग्रह करते हुए कहा वह 2-3 दिन में ही बाकी रुपए इकट्ठे करके ले आएगा, तब तक वह ये 150 रुपए रख ले, दुकानदार ने राजू की बात मान ली.

राजू ने ज्यादा मेहनत करके पैसे इकट्ठे किए और तीन दिन बाद वह कैमरा दुकानदार से ले लिया. घर आकर उसने कैमरा मेज पर ये सोचते हुए रख दिया कि उसकी मां जैसे ही काम से वापस आएगी, इस यंत्र को देखेगी और मुस्कुराने लगेगी. परंतु उल्टा उसकी मां ने घर में आते ही इतने महंगे कैमरे को देखते ही राजू को डांटना और मारना शुरू कर दिया. राजू रोते हुए घर से बाहर निकल गया, काफी देर हो जाने पर भी जब राजू घर वापस नहीं आया तो मां चितिंत होकर उसे ढूंढने लगी. तभी किसी ने बताया की राजू रोता हुआ जा रहा था तो रास्ते में एक बड़े पत्थर से टकराकर गिर गया उसे ज्यादा चोट लगी है वह अस्पताल में है.

मां अस्पताल पहुंचने पर राजू को देख कर रोने लगी मां को अपने पास आया देखकर राजू मुस्कुराने लगा मां के आंसू पोंछते हुए मंद मुस्कान के साथ बोलता है मां वह यंत्र मैं तुम्हें हंसाने के लिए लाया था न कि रुलाने के लिए. राजू की भोली बातें सुनकर रोती हुई मां के आंसू भरे चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है. यह देखकर राजू मां के गले लग जाता है.

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