कांग्रेस में उसके नेता ही समस्या

भोपाल के श्यामला हिल्स पर मुख्यमंत्री निवास के ठीक सामने, उतना ही बड़ा, एक बँगला कमलनाथ के नाम पिछले २० सालों से आवंटित है. मेरे देखते हुए उसमे वे आज तक नहीं रुके. दिल्ली में तीन साल से विपक्ष में रहते हुए पिछले दिनों उन्होंने जब से भोपाल में नेतृत्व करने की इक्षा जताई है तभी से उनके इस निवास में काम चल रहा है. स्वाभाविक है सरकारी बँगला है इसलिए सरकारी पैसे से ही सब कुछ हो रहा है.
जब कल कमलनाथ एक लंबे अरसे के बाद भोपाल आये तो उन्होंने बंगले का मुआयना किया. उन्हें नया निर्माण पसंद नहीं आया इसलिए बहुत कुछ तोड़ कर उसमे नया करवाने की इक्षा उन्होंने जताई. इसमें एक पोर्च का टूटना भी शामिल है.
कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री की इक्षा शिवराज सरकार के लिए आदेशसामान हो गयी. जी हाँ आदेश इसलिए क्योंकि बंगले के पुनर्निर्माण के लिए साक्षात् मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और नगरीय निकाय के सचिव दोनों पहुंचे. दोनों वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने खुद खड़े होकर कमलनाथ की इक्षाअनुरूप निर्माण के निर्देश दिए. हाँ यह बात बिना कहे ही समझी जा सकती है कि वे अपने बॉस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से बिना पूछे नहीं गए होंगे.
यहीं पर 130 साल पुरानी पार्टी और मध्य प्रदेश के उसके नेता बहुत ही विनम्र और साधारण से दिखने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मात खा जाते हैं. शिवराज आम जनता जैसा दिखने का कोई मौका नहीं छोड़ते, वहीँ कांग्रेसी दिग्गजों के हर कदम से इलीटहोने की आहट आती है. बंदूकधारियों से घिरे कांग्रेस के ये नेता जब तक शिवराज सिंह जैसा साधारणनहीं दिखेंगे तब तक इनकी स्वीकार्यता जनता में नहीं बनेगी. कार्यकर्ताओं को तो अपना नेता झाकीं वाला ही पसंद आता है पर इससे जनता चिढ़ती है.
अब कांग्रेस के नेताओं को कौन समझाये की पिछले 11 सालों में शिवराज ने मध्य प्रदेश में राजनीति का नया व्याकरण गढ़ दिया है जिसमे हवा-हवाई करने वाले नेताओं से जनता चिढ़ने लगी है. कांग्रेस को अभी भी लगता है की नेताओं के समर्थक कार्यकर्ताओं से चुनाव जीते जा सकते हैं. उनकी नज़र में आज भी जनता गौण है.
अगर सचमुच में कांग्रेस प्रदेश में भाजपा को टक्कर देना चाहती है तो उसके नेताओं को सुविधा की राजनीति छोड़ना होगी. सड़कों की धूल फांकना होगी. यह बात अलग है कि बड़े नेता जो सालों मंत्री रह चुके हैं वह ऐसा करने से रहे.
इसलिए अब तो ऐसा लगने लगा है की कांग्रेस की समस्या उसके यही नेता ही हैं. प्रदेश की जनता तो सरकार बदलना चाहती है पर जैसे ही वह शिवराज जैसे नेता से कांग्रेस के नेताओं की तुलना करती है मन बदल लेती है.
प्रदेश में चुनाव 2018 के आखिर में हैं देखते हैं कांग्रेस पार्टी जनता के इस मूड को कैसे पकड़ती है.

साभार लेख- मध्यप्रदेश के ऑनलाइन समाचारपत्र mpheadline से दीपक तिवारी का.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *