कवि प्रदीप

कवि प्रदीप अर्थात रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी
कवि प्रदीप अर्थात रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी

“ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी”

स्वर-सम्राज्ञी लता मंगेशकर के गाए इस अमर गीत के रचियता हैं  “राष्ट्र कवि भारत रत्न कवि प्रदीप”. 1962 के चीनी आक्रमण के समय मारे गए भारतीय सैनिकों को समर्पित  यह देशभक्ति-गीत कवि प्रदीप ने अपनी कलम से रचा था.

कवि प्रदीप अर्थात रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी का जन्म 6 फरवरी 1915 को मध्यप्रदेश के छोटे से शहर बडनगर  के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. हिन्दी कविता लिखने में रूचि रखने वाले प्रदीप ने 1939  में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक तक की पढ़ाई करने के पश्चात शिक्षक बनने का प्रयत्न किया इन्हीं दिनों वे कवि सम्मेलनों में कविता पाठ  भी करने लगे,  ऐसे में उन्हें मुंबई में हो रहे एक कवि सम्मेलन का निमंत्रण मिला यहाँ बॉम्बे टॉकीज़ के हिमांशु रॉय से उनका परिचय हुआ, वे उनसेइतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें 200 रुपये प्रतिमाह की नौकरी दे दी. कवि प्रदीप ने यह बात स्वयं बीबीसी के एक साक्षात्कार में बताई थी. उन्होनें प्रदीप को अपनी फिल्म कंगन  में गीत लिखने के लिए कहा 1939 में रिलीज़ यह फिल्म देविका रानी और अशोक कुमार द्वारा अभिनीत थी प्रदीप को पहली पहचान 1940 में रिलीज़ फिल्म बंधन से मिली1943 में उनका लिखा क़िस्मतफिल्म का गीत बहुत प्रसिद्ध हुआ था –

आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है,दूर हटो… दूर हटो ऐ दुनियावालों हिंदोस्तान हमारा है.

कवि प्रदीप ने अनेक गीत लिखे जो बच्चों में अत्यंत लोकप्रिय हुए जिनमें जाग्रति और गंगा जमुना के गीत मुख्य हैं

दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल. एवं आओ बच्चो! तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदोस्तान की,इस मिट्टी से तिलक करो यह धरती है बलिदान की.  या फिर हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चो! संभाल के.

कवि प्रदीप ने देशभक्ति गीतों के अलावा अन्य प्रकार के गीतों में भी अपनी छाप छोड़ी है 1969 में प्रदीप कुमार अभिनीत फिल्म बंधन का गीत ” चल अकेला चल अकेला तेरा मेला पीछे छूटा राही ” ऐसे गीतों में शामिल एक गीत है.

मशहूर फिल्म संतोषी माँ के गीत ” मैं तो आरती उतारूँ रे और ” यहाँ वहां जहाँ तहां जैसे लोकप्रिय गीत भी उनकी कलम से ही निकले थे “
कवि प्रदीप ने उनकी कविताओं सहित 72 फिल्मों के लिए लगभग 1700 गीत लिखे  HMV, संगीत कंपनी द्वारा उनके 13 गानों का एक एलबम निकाला गया था .

“ऐ मेरे वतन के लोगों” गीत को जब लता मंगेशकर ने गाया तो वहाँ उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम हो गईं. भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व० पं० जवाहरलाल नेहरू भी स्वयं को रोक न पाए और उनकी आँखे भी भर आई थीं.

कवि प्रदीप अर्थात रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी
कवि प्रदीप अर्थात रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी

कवि प्रदीप को भारत सरकार द्वारा 1998 में भारतीय फिल्मों के सबसे बड़ा सम्मान  दादा साहब फालकेपुरस्कार से अलंकृत किया गया था. अपने गीतों के लिए सदैव याद रखे जाने  कवि प्रदीप का 11 दिसम्बर 1998 को निधन हो गया. 14 दिसंबर 2011 को उनकी स्मृति और सम्मान में भारतीय डाक विभाग ने 5 रूपये मूल्य का डाक टिकट जारी किया था.

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