और मोहित समझ गया


नन्हे मोहित के पटाखे खरीदने की जिद करने पर उसके पापा उसे बाजार ले गए रास्ते में ऐसा क्या हुआ कि मोहित का मन पटाखे चलाने का नहीं रहा.

टन…टन….टन…. स्कूल की घंटी बजी. सारे विद्यार्थी कक्षाओं से निकल कर लाइन में सीढ़ियों से उतरने लगे. सभी आपस में बातें कर रहे थे, सभी में उत्साह, उमंग और मस्ती भरी हुई थी सभी बेहद खुश थे. आज स्कूल का आखिरी दिन था. कल से दीपावली की छुटिटयां शुरू हो रही थी. पूरे बीस दिन बाद स्कूल खुलने वाले थे. इन बीस दिनों में वे क्या करेंगे ये वो अपने दोस्तों को बताने में लगे हुए थे. छुटिटयों को कैसे बिताने वाले हैं दीपावली कैसे मनाएंगे ऐसी बातों से स्कूल का प्रांगण गुंजायमान था. 
गेट पर पहुंचते पहुंचते सभी एक दूसरे को विदा देने लगे कोई हाथ हिला रहा था, कोई फोन नंबर ले दे रहा था. सभी आपस मेें एक दूसरे को हैह्रश्वपी दीपावली बोल रहे थे. कुछ विद्यार्थी बोल रहे थे, कुछ उन्हें ग्रीटिंग कार्ड दे रहे थे. मोहित भी बड़ा खुश था. उसने तो छुटिटयां कैसे बितानी हैं इसकी योजना पहले से ही बना ली थी बस अब उसे पूरा करना था. इस दिवाली पर उसकी योजना ढेर सारे पटाखे चलाने, मिठाईयां खाने और मौजमस्ती करने की थी परंतु इस सभी में जब स्कूल में दिए गए दीपावली के गृह कार्य की याद आती तो उस मूड खराब हो जाता.घर पहुंचते ही उसने बस्ता जगह पर रखा और हाथ मुंह धोने चला गया.
खाना खाते हुए मोहित मां से बोला मम्मी, पापा शाम को कितने बजे घर आएंगे?
छह बजे मां ने कहा.
क्यूं कोई काम है पापा से मां ने पूछा
हां पटाखे लेने जाना है मोहित ने खुशी से बताया.
लेकिन अभी तो दिपावली आने में कई दिन बाकी हैं.
तो क्या हुआ? मेरे सभी दोस्त तो कितने दिनों से पटाखे चला रहे हैं.
उन्हें चलाने दो, आह्रश्वाको परसों पटाखे दिलाएंगे सुनते ही मोहित गुस्सा हो गया.
शाम को पापा के आते ही वह उन के गले में हाथ डाल कर बोला,पापा जल्दी तैयार हो जाइए.
कहां जाना है भाई पापा हंस कर बोले 
बाजार, मुझे पटाखे खरीदने हैं. 
ठीक है चलेंगे लेकिन आज नहीं दो दिन बाद.
ये सुनते ही मोहित जोर जोर से रोने लगा
मम्मी-पापा, आप दोनों गंदे हैं, सभी बच्चे पटाखे ले आए हैं, बस आप ने ही नहीं दिलाए हैं.
सुनते ही पापा बोले आज से आप के स्कू ल की छुटटी हुई है आज रोइये मत,आप तैयार हो जाओ, चलो हम पटाखे खरीद कर लाते हैं, पापा बोले.
मोहित ने रोना बंद कर दिया, खुश होकर उसने ताली बजाई और पापा के गाल पर पह्रश्वपी दी.
मोहित सात वर्ष का दूसरी कक्षा में पढ़ने वाला बच्चा था. वह अपने मम्मी पापा के साथ शहर से बाहर बनी कॉलोनी में रहता था. उस के घर के चारों ओर का वातावरण बहुत शांत और साफ सुथरा था. वह शहर के एक अच्छे स्कूल में पढ़ता था उसकी एक बड़ी बहन रागिनी थी जो सातवीं कक्षा में पढ़ती थी. वह बहुत समझदार लड़की थी और किसी बात के लिए जिद नहीं करती थी.
थोड़ी देर में ही मोहित तैयार होकर आ गया. पापा ने तब तक चाय पी ली थी. पापा ने स्कूटर स्टार्ट किया तो मोहित उछल कर पापा के पीछे सीट पर बैठ गया. अभी पापा स्कूटर ले कर गेट के बाहर निकले ही थीे कि उन्हें रूकना पड़ा. मोहित ने देखा कुछ बच्चे बीच सड़क पर पटाखे चला रहे हैं, इसलिए पापा को स्कूटर रोकना पड़ा था. मोहित को बाजार जाने की जल्दी थी और उसे इन लड़कों के सड़क पर पटाखे चलाने पर गुस्सा आ रहा था जिनकी वजह से उसे देर हो रही थी, उनके थोड़े से पटाखे चलाने के बाद पापा ने स्कूटर आगे बढ़ाया. पटाखों का बाजार पुराने शहर की तरफ था मोहित ने देखा रास्ते भर लोग सड़क के बीच में पटाखे चला रहे थे जिससे उन को स्कूटर बार बार रोकना पड़ रहा था.
तभी उसने देखा एक बूढ़े अंकल, आंटी को रोड क्रॉस करनी थी. वे पटाखों की वजह से एक तरफ खड़े हुए थे. पापा ने स्कूटर रोका और उन लोंगों को हाथ पकड़कर रोड क्रॉस करवाई. तब वे वापस आगे चले. शहर की तरफ पहुंचते ही मोहित को खांसी आनी शुरू हो गई. चारों तरफ पटाखों का धुंआ था. मोहित को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. उस के मुंह से निकल ही गया इतने पटाखे चलाने की क्या जरूरत है? 
पटाखों की दुकान पर भी बहुत भीड़ थी. काफी रूपयों में मोहित के पापा ने थोड़े से पटाखे खरीदे. लेकिन अब मोहित के मन में पहले जैसा जोश नहीं रहा था.
पटाखे खरीद कर वे दुकान से बाहर आए और स्कूटर की तरफ जा ही रहे थे कि तभी एक रॉकेट उड़कर एक पटाखे की दुकान पर गिर गया और वहां आग लग गई. लोग इधर उधर भागने लगे. मोहित ने अपने पापा का हाथ कस कर पकड़ लिया, वह डर गया था और मन ही मन सोच रहा था कि पटाखों से कितना नुकसान होता है तभी वहां फायर ब्रिगेड आ गई और उन लोंगों ने आग बुझा दी. मोहित पापा के साथ घर लौट रहा था जब वे अपनी कॉलोनी की तरफ मुड़ रहे थे तब एक कुत्ते का पिल्ला जोर जोर से आवाजें करता हुआ इधर उधर भाग रहा था. मोहित के पापा ने स्कूटर रोक कर पिल्ले को पकड़ा, मोहित ने देखा पिल्ले की पूंछ में पटाखों की लड़ी बंधी हुई जल रही थी. पापा ने बताया पटाखों के जलने की आवाजों से डरकर ये इधर उधर भाग रहा था इससे इसकी पूंछ भी जल गई है.
मोहित अब बहुत दुखी हो गया था. जब वह घर पहुंचा उसका उदास चेहरा देखकर मां ने पूछा क्या हुआ बेटा?
मोहित बोला- मां मैं पटाखे नहीं चलाऊंगा, ये सबको परेशान करते हैं, वातावरण में धुंआ फैलाते हैं, जानवर भी इनसे डरते हैं, इनसे आग भी लग जाती है.
मां ने मोहित को ह्रश्वयार करते हुए समझाया- पटाखे चलाओ, पर कम चलाओ और इन्हें घर में या सड़क पर नहीं बल्कि खुले मैदान में चलाना चाहिए, वो भी बड़ों की निगरानी में और हां, वो भी सिर्फ दीपावली के दो या तीन दिन.
मोहित अब समझ गया था कि उस के मां पापा उसे पटाखे देर से क्यूं दिलवाते हैं….
डॉ. डी.एन.गुप्ता

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