एक पिता

इस सन्दर्भ में कई सामाजिक विश्लेषकों और मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों से बातचीत के साथ साथ बच्चों से भी चर्चा की गई और कुछ मेरे अपने अनुभव से मैंने इस लेख को लिखा  —डॉ. मुकुल चौकसी ( लेखक प्रख्यात मनोचिकित्सक हैं )

सबसे पहले हर पिता को ये समझ आना चाहिए की अब वह एक पिता है. हमेशा फादर्स डे  आने पर अख़बारों के रंगीन पन्नों में , रेडियो पर बातचीत की जाती है कि आप पिता के लिए क्या करें या फिर वर्तमान में बुजुर्ग पिता का ख्याल कैसे रखें, इन सब बातचीतों के बीच में आप वर्तमान में सही पिता कैसे बनें इस पर कोई चर्चा नहीं होती है सबसे पहले तो हमें समझना होगा  की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं चाहे वे आर्थिक हों या फिर  सामाजिक , मनोवैज्ञानिक . नहीं बदलता है तो वह है रिश्तों का सत्य . हमेशा से ही भारत हो या  और कोई देश, पिता को घर के संरक्षक के तौर पर देखा जाता रहा है इसलिए पिता को सबसे पहले समझना होगा की अब वो पहले वाला कॉलेज गोइंग युवा नहीं है उसे अपने व्यक्तित्व और व्यवहार दोनों को ही बदलना होगा . जिस प्रकार मां बनते ही एक युवती से ढेरों अपेक्षाएं रखी जाती हैं उसी तरह पिता की जिम्मेदारियां भी कम नहीं हैं बचपन में बच्चे को गोदी में खिलाना या उसके साथ खेलना काफी नहीं है आपको अपने स्वभाव में परिपक्वता लानी होगी, ऐसा नहीं हो की आप ने बच्चे से कहा पानी लाना और उसके मना करने पर आप उसे कहने लगें “ठीक हैं अब मांगना मुझसे कुछ, मैं भी तुम्हारी बात नहीं मानुंगा” “अक्सर घरों में ये सब देखने को मिल जाता है.
पिछली पीढ़ी से जो आपको मिला है उसमें से अच्छे संस्कार साथ लें बाकी नए ग्रहण करें. आप नए पिता बने हैं आपके विचारों में, व्यवहार में ऐसा सन्देश होना चाहिए जिन्हें बच्चेआप से ग्रहण करके अपने आप पर और आप पर गर्व करें , सामान्यतः ज्यादातर सफल व्यक्ति के पीछे उसके पिता का व्यक्तित्व होता है आपकी कार्यशैली प्रेरणादाई होनी चाहिए. आप को  ईमानदार , मेहनती और नई विचारधारा का होना चाहिए . बच्चों से प्रेम पूर्वक पेश आएं . अब वो समय नहीं रहा की पिता घर में आए तो बच्चे डर कर चुप बैठें . उनसे नए और प्रासंगिक साथ ही उनसे सम्बंधित विषयों पर बात चीत करें , ध्यान रखें चर्चा करते समय आपकी आवाज और भाव कठोर न हो . सबसे महत्व्पूर्ण बच्चों के लिए आदर्श पापा बनें .
बच्चे अपने पापा के पास अपनी हर समस्या का समाधान चाहते हैं साथ ही वे मानते हैं की हमारे पापा दुनिया के सबसे ज्यादा बुद्धिमान और समझदार पापा हैं इसलिए हमेशा बच्चों से बुद्धिमत्ता पूर्वक व्यवहार करें . आप हास्य एवं मनोरंजन के लिए हलके विषय चुनें लकिन बातचीत का स्तर हल्का न हो उद्धरण के तौर पर टी. वी. देखते समय  कलाकारों के वस्त्रों पर नकारात्मक टिप्पणी आपका स्तर बच्चों की निगाह में गिरा सकती है अपनी शब्दावली अच्छी रखें . बच्चों से गलती होने पर उसके लिए मन में दुर्भावना न रखें बल्कि प्यार से उसे समझाएं.
 यदि बेटी के पापा हैं तो उसकी भावनाओं का पूरा ख्याल रखें , लड़कियां प्राकर्तिक रूप से ही संवेदनशील होती हैं इस बात का पूरा ख्याल रखें. युवा होते बच्चे अपने माता पिता में एक परिपक्व ,संजीदा व्यक्तित्व तलाश करते हैं साथ ही एक ऐसा दोस्त चाहते हैं जो उसे हर समस्या पर सही मार्गदर्शन दे सके , उसकी बातें सुनें और समझे, ना कि अपने निर्णय और इच्छाएं उस पर थोपें, विशेष तौर पर लड़कियां अपने पिता को बहुत ऊँचे दर्जे पर देखना चाहती हैं.
युवा होते बच्चे भावनात्मक तौर पर एक खतरनाक मोड़ पर होते हैं घर में सही वातावरण ना मिलने पर वे दोस्त कि तलाश में बाहर देखने लगते हैं जो अक्सर उनके जीवन के लिए खतरनाक साबित होता है एक और मह्त्वपूर्ण बात वर्तमान में सामाजिक समबन्धों कि कमी से आप का व्यवहार भी नीरस और असामाजिक हो सकता है अत: सामजिक बनें , आस पास के वातावरण से सही और गलत समझने कि कोशिश करें , सामाजिक मान सम्मान को जीवन में महत्व दें और बच्चों को भी इसे बताएं , इससे वे गलत रास्तों पर जाने  से पहले स्वनियंत्रित होना सीखेंगे , सामाजिक नियंत्रण बच्चों और बड़ों दोनों को समाज के साथ जीना सिखाता है
जिस घर में बड़े कहते पाए जाते हैं कोई कह रहा है तो कहने दो, हम तो ऐसे ही हैं, तुम बदल जाओ या फिर हम तो नहीं बदलेंगे ,या तुम हो ना समझदार बहुत है, ऐसे घरों में हमेशा तनाव कि स्थिति और बच्चों बड़ों के बीच मर्यादाएं नहीं रहती हैं ऐसे घरों में समय गुजरने के साथ पापा अकेले हो जाते हैं परिपक्व बनें , बुद्धिमान बनें , अनुशासित रहे ,प्रेम पूर्ण व्यवहार रखें छोटों से बराबरी ना करें . ध्यान रखें केवल आप ही बच्चे से उम्मीद नहीं रखते हैं वह भी अपने पापा से उम्मीद रखता है प्रयास करें , बच्चों के प्यारे , आदर्श पापा बनें.

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