एक थी बा

20 मई 2015 को छोटे पर्दे के धारावाहिकों की मशहूर सास सुधा शिवपुरी का निधन हो गया, क्योंकि सास भी कभी बहू थी कि बा सुधा शिवपुरी सन् 2000 से 2005 तक की टेलीविजन दर्शकों की चेहती बा बनी रही.

गुजराती पृष्ठभूमि के इस धारावाहिक में बा के अभिनय को जीवंत बनाने वाली सुधा शिवपुरी का जन्म 14 जुलाई 1937 को इंदौर मध्यप्रदेश में हुआ था. बचपन में ही उनका परिवार राजस्थान आ गया. 1968 में उनका विवाह अभिनेता ओम शिवपुरी के साथ हुआ. उन्हीं के साथ मिलकर नाट्य समूह प्रारंभ किया. जिसके अन्र्तगत मोहन राकेश लिखित आधे-अधूरे, तुगलक जैसे नाटक प्रदर्शित किए गए. 1974 में इनका परिवार मुंबई स्थानान्तरित हो गया. 1977 में सुधाजी ने अपना फिल्मी कैरियर बासु चटर्जी की फिल्म स्वामी से प्रारंभ किया. यह फिल्म शबाना आजमी और गिरीश कर्नाड के सशक्त अभिनय एवं येसुदास के गाए गीत का करुं सजनी आए ना बालम की वजह से दर्शकों में बेहद पसंद की गई. इसी फिल्म में शबाना आजमी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में चरित्र कलाकार के रूप में अपने अभिनय की छाप छोड़ी. उनके द्वारा अभिनीत फिल्मों में विधाता, माया मेमसाब, इंसाफ का तराजू, सावन को आने दो, हमारी बहू अलका जैसी फिल्में शामिल हैं.

1985 से उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों की तरफ अपने कदम बढ़ाए, बासु चटर्जी द्वारा निर्देशित प्रसिद्ध दूरदर्शन धारावाहिक रजनी में प्रिया तेंदुलकर की सास का किरदार निभाया. उनके द्वारा अभिनीत धारावाहिकों मे आ बैल मुझे मार, रिश्ते, सरहदें, बंधनÓ के नाम उल्लेखनीय हैं.

वर्ष 2000 में पति की मृत्यु के पश्चात उन्होंने पूर्ण रूप से टेलीविजन धारावाहिकों को ही अपना कार्यक्षेत्र बना लिया और तब उनका टेलीविजन के पर्दे पर अमर पात्र एकता कपूर के क्योंकि सास भी कभी बहू थी की बा के रूप में सामने आया. साथ-साथ उन्होंने और भी धारावाहिकों में अभिनय किया, जिनमें शीशे का घर, वक्त का दरिया, दमन, संतोषी मां, यह घर, किस देश में है मेरा दिल में उन्होंने अपनी जीवंत छाप छोड़ी है. सन 2003 में अमृता प्रीतम द्वारा लिखित उपन्यास पर चंद्रप्रकाश द्विवेदी द्वारा निर्देशित फिल्म पिंजर में उन्होंने अपने यादगार अभिनय की छाप छोड़ी.

सुधा शिवपुरी को उनके बेहतरीन चरित्र अभिनय के लिए कई पुरस्कारों से समय-समय पर सम्मानित किया गया. जिनमें वर्ष 2009 में थिएटर क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी अवार्डर् से सम्मानित किया गया. सन 2003 से 2009 तक बा क अभूतपूर्व किरदार के लिए उन्हें स्टार परिवार अवार्ड से भी सम्मानित किया गया.

आज सुधा शिवपुरी हमारे बीच नहीं हैं परंतु अपने अभिनय एवं एक आधुनिक और आदर्श दादी मां बा के रूप में हमेशा हमारी स्मृतियों में रहेगी।

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