एकल परिवार में जब एक हो जाये बीमार


वर्तमान परिस्थितियों में परिवार नामक सामाजिक इकाई एकल परिवार में तब्दील हो गयी है पहले की तरह संयुक्त परिवार नहीं होते हैं परिस्थतियों के अनुसार लोग एकल परिवार में रहने लगे हैं इसके कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं विशेष तौर पर जब कोई विपत्ति आ पड़े तो, खास तौर पर बीमारी.  इसके लिए डॉक्टर दीपा शाह कहती हैं की न्यूक्लियर फैमिली ट्रेंड तो भारत में आ चुका है लेकिन इस ट्रेंड को अपनाने वालों को ये नहीं पता की पाश्चात्य देशों में वृद्ध और बच्चों की जिम्मेदारी वहां की सरकार की होती है वही उन्हें हर प्रकार की सुरक्षा और सुविधा मुहैया कराती है साथ ही तकनीकी और मेडिकल तौर पर वहां पर ऐसे संसाधन हैं कि वृद्ध हो या बच्चा किसी को भी विपरीत परिस्थतियों से निबटने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है. वहाँ जब कोई बीमार होता है और उसे तत्काल चिकित्सा की जरुरत होती है तो एम्बुलैंस का इंतज़ार नहीं करना पड़ता है इनके सामान्य पब्लिक वाहन ऐसे होते हैं जो बिना रूकावट सड़कों पर तेज़ी से दौड़ते हैं और इनसे मरीज़ को अस्पताल पहुँचाया जाता है.  
एकल परिवार में अपने साथी के स्वास्थ्य के साथ बीमारी में कुछ ख़ास बातें ध्यान रखनी चाहिए –
लक्षण
सामान्य की अपेक्षा कमजोरी महसूस हो या बुखार हो, बुखार उतर नहीं रहा हो, पेट से सम्बंधित परेशानी हो तो लापरवाही न बरतें तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और आवश्यक इलाज लें.
फर्स्ट एड किट
घर में हर समय एक सामान्य फर्स्ट एड किट तैयार रखें जिसमें सामान्य बुखार, पेट दर्द, सर दर्द ,थकान एवं चोट लगने पर, जलने पर लगने वाली दवाइयां व ट्यूब उपलब्ध हों कुछ बैंडेड भी अवश्य रखें , आपात स्थिति हो या रात्रि का समय हो ये आपके लिए तुरंत मददगार हो सकते हैं.
डॉक्टर से खुलकर बात करें
 बीमारी के बारे में डॉक्टर से खुलकर बात करें , बीमारी से सम्बंधित कोई भी तथ्य न छिपाएं , पूर्व में कुछ ऐसे तथ्य हों जो वर्तमान बीमारी से सम्बंधित हो सकते हैं उनकी डॉक्टर को पूरी जानकारी दें डॉक्टर को बताएं आप क्या महसूस कर रहें हैं आप को क्या तकलीफ है  आदि.
स्वयं डॉक्टर न बनें
 अपनी बीमारी का इलाज तुरंत और सम्बंधित चिकित्सक से ही लें स्वयं अपनी आधी अधूरी या सुनी सुनाई जानकारी पर आधारित ज्ञान से इलाज न करें न ही किसी नीम हक़ीम के पास जाएँ. हमेशा अनुभवी व सम्बंधित डॉक्टर से ही अपना इलाज करवाएं.
भावनात्मक सम्बल
एक दूसरे को भावनात्मक सम्बल प्रदान करें. बीमार व्यक्ति के आगे आशावादी रहें और बीमार व्यक्ति को भी ज्यादा असहाय बनकर दूसरे साथी की परेशानी नहीं बढ़ानी चाहिए.

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