उठो जागो दोस्तों:- स्वामी विवेकनान्दजी का जन्म दिन मनाये!

उठो जागो दोस्तों:-
 स्वामी विवेकनान्दजी का जन्म दिन मनाये!

स्वामी विवेकानंद का आज जन्मदिन है. उनका जन्‍म 12 जनवरी 1863 को हुआ था. पहले उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्ता (नरेन) था जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से मशहूर हुए. विवेकानंद के बारे में कहा जाता है कि वह खुद भूखे रहकर अतिथियों को खाना ख‍िलाते थे और बाहर ठंड में सो जाते थे. विवेकानंद बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे. कम उम्र में ही उन्‍होंने वेद और दर्शन शास्‍त्र का ज्ञान हासिल कर लिया था. स्वामी विवेकानंद देश के सबसे प्रशंसित और जाने-माने आध्यात्मिक गुरु हैं. दुनिया उन्हें महान हिंदू संत का दर्जा देती है. पश्चिमी देश उन्हें चक्रवर्ती हिंदू संत की उपाधि देते हैं. न सिर्फ भारत बल्कि पूरी आध्यात्मिक दुनिया का उनसे परिचय है.

स्वामी विवेकानंद श्री रामकृष्ण परमहंस के मुख्य शिष्य थे. उन्हें परिव्राजक या घूमने वाले संत के रूप में जाना जाता है. स्वामीजी ने शिकागो से कोलंबो और हिमालय से कन्याकुमारी तक की यात्राएं की. आध्यात्मिक ज्ञान की खोज और वेदांत के संदेशों के प्रसार के लिए उन्होंने लंबी यात्राएं की.

दोस्तों ,  आज उनके जन्मदिन पर उनका एक श्लोक स्मरण  करना चाहुगी – रुचिनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम… नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव…इसका अर्थ है – जिस तरह अलग-अलग स्रोतों से निकली विभिन्न नदियां अंत में समुद्र में जाकर मिल जाती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता है, जो देखने में भले ही सीधे या टेढ़े-मेढ़े लगें, परंतु सभी भगवान तक ही जाते हैं.

विवेकानन्द बड़े सपने देखने वाले थे। उन्‍होंने एक ऐसे समाज की कल्‍पना की थी जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्‍य-मनुष्‍य में कोई भेद न रहे। उन्‍होंने वेदान्त के सिद्धान्तों को इसी रुप में रखा। अध्‍यात्‍मवाद बनाम भौतिकवाद के विवाद में पड़े बिना भी यह कहा जा सकता है कि समता के सिद्धान्त का जो आधार स्वामी विवेकानन्‍द ने दिया उससे सबल बौद्धिक आधार शायद ही ढूँढा जा सके। विवेकानन्‍द को युवकों से बड़ी आशाएं थीं।

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