आभूषण सोने के..

कभी सोने की चिडिय़ा कहा जाने वाला भारत देश आज भी सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है. ऐतिहासिक युग में राजा, महाराजा, बादशाह, सोने, चांदी और हीरे मोती के जखीरे को अपनी शान-शौकत और ताकत प्रदर्शन का जरिया मानते थे. सोना क्योंकि सबसे महंगी धातुओं में से एक है अत: देश में वैवाहिक तथा अन्य रस्मों में आज भी स्वर्णाभूषणों को सबसे शानदार उपहार माना जाता है.- परेश.

भारतीय परंपरा में सदियों से महिलाओं का आभूषणों के प्रति रहा आकर्षण आज के आधुनिक युग में भी बरकरार है. श्रृंगार का अभिन्न अंग और महिलाओं की कमजोरी समझे जाने वाले आभूषणों की चमक कभी फीकी नहीं पड़ेगी. हालांकि पारंपरिक ज्वेलरी की तरफ महिलाओं का रूझान कुछ कम हुआ है और वे डिजाइनर ज्वेलरी पसंद करने लगी हैं. पसंद और सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव के कारण भारी, जड़ाऊ एवं पारंपरिक आभूषण खरीदना और पहनना महिलाओं के लिए सहज नहीं रहा है. इसलिए तकनीकी के आधुनिक युग में, आभूषणों में भी आधुनिकता की झलक स्पष्ट तौर पर नजर आने लगी है. इसी बदलाव के कारण स्वर्णाभूषण आज भी महिलाओं की आभूषणों में पहली पसंद है.

वराछा रोड के ज्वेलरी शोरूम वणीराज ज्वेल्स के श्री निलेश शिरोया बताते हैं कि भारतीय माणिक्य और आभूषण उद्योग नई ऊंचाईयां छू रहा है. आज महिलाएं आभूषणों को अवसर के अनुसार पहनना पसंद करती हैं. इनमें जब मौका किसी खास अवसर का हो तो वे डायमंड या गोल्ड आभूषण पहनती हैं परंतु डायमंड ज्वेलरी, गोल्ड ज्वेलरी से महंगी होने के कारण आसानी से खरीदी नहीं जाती है इसलिए हमने गोल्ड और डायमंड को मिलाकर हाईब्रिड क्रिएशन किया है. इसमें डायमंड और गोल्ड दोनों का फ्यूजन किया गया है इसे फ्यूजन ज्वेलरी का नाम दिया है. मूल्य में ये परंपरागत ज्वेलरी से काफी कम हैं एवं दिखने मे ज्यादा आकर्षक. इनका स्वरूप महिलाओं में दिन ब दिन ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है. नीलेश बताते हैं कि फ्यूजन ज्वेलरी में निम्र गुणवत्ता की ज्वेलरी भी बाजार में उपलब्ध है. अत: इसे खरीदते समय प्रतिष्ठित ब्रांड एवं दुकान का अवश्य ध्यान रखना चाहिए. गुणवत्ता को लेकर खरीदारों में जागरूकता बढ रही है. ब्रांडेड और हॉलमार्क वाले आभूषण ही विश्वसनीय माने जाते हैं.

सूरत जो कि डायमंड का हब कहा जाता है आज सोने के आभूषणों के भी प्रमुख उत्पादक शहरों में गिना जाने लगा है. बंगाल से आए हुए बंगाली मैन्युफैक्चरर एवं कारीगर अपनी छोटी और मध्यम यूनिटों में बेहतरीन कारीगरी के नमूनों से सजी, आकर्षक ज्वेलरी बना रहे हैं. जिससे यहां डायमंड के समानांतर गोल्ड मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री भी विकसित हो रही है. सूरत के अधिक आभूषण विक्रेता अपने आभूषणों की डिजाइनें एवं उत्पादन इन छोटी ज्वेलरी यूनिटों से करवा रहे हैं जिससे उनको कम लागत में ट्रेंडी ज्वेलरी मिल रही है. साथ ही इससे हजारों बंगाली कारीगरोंको रोजगार मिला हुआ है.

देश में बढ़ती हुई कामकाजी महिलाओं की संख्या और असुरक्षित परिस्थितियों के कारण आभूषणों के प्रमुख निर्माता ऐसे आभूषणों के निर्माण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं जो इन परिस्थितियों में वर्किंग वूमन की पसंद की कसौटियों पर खरे उतरसकें. पहनने में हल्के, कम कीमती, परंतु दिखने में ज्यादा आकर्षक हों ऐसे आभूषण बनें इस पर फोकस किया जा रहा है.

सभी बड़ी ब्रांडिंग ज्वेलरी निर्माता कंपनियां नए जमाने की नारी की जरूरतों के अनुसार आभूषणों की नई नई श्रृंखलाएं बाजार में उतार रही हैं.

स्वतंत्र रूप से आभूषणों के उत्पादन यूनिट होल्डर और डायमंड एवं गोल्ड ज्वेलरी के उत्पादन के वर्षों के अनुभवी वराछा रोड के आभूषण उद्योगपति श्री छगनभाई लखपति आभूषणों के क्षेत्र में आए परिर्वतन एवं ट्रेंड के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं आज ट्रेडिशनल ज्वेलरी से ज्यादा ट्रेंडी ज्वेलरी की धूम है. वे बताते हैं आभूषणों के क्षेत्र में आए हुए परिवर्तन और महिलाओं की आधुनिक मानसिकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पेपर ज्वेलरी का आविष्कार किया है.गोल्ड है तो ज्वेलरी है वाली मानसिकता को बदलने के लिए इसमें वुडन, ग्लास, बीडस, क्रिस्टल, कुंदन, स्टोन, पोल्की, प्लास्टिक बीडस तथा सेमी प्रेशियस स्टोन का उपयोग गोल्ड ज्वेलरी में करके पेपर ज्वेलरी बनाई गई है.

पेपर ज्वेलरी पहनने में हल्की और स्किन फ्रेंडली है.इïससे किसी भी प्रकार की त्वचा पर एलर्जी नहीं होती है. साथ ही ये इयररिंग्स और ïसिंगल पेंडेट में भी उपलब्ध है, इसे इसके इन गुणों के कारण स्किनफ्रेंडली ज्वेलरी भी कहते हैं. तकनीक के युग में जबकि लोग खरीदारी के लिए ऑनलाइन प्लैटफ़ार्म का उपयोग ज्यादा करने लगे हैं. इसका उत्तर देते हुए डी नवीनचंद ïज्वेलर्स के नवीनजी सोनी बताते हैं कि ५००० रूपए तक के आभूषण ऑनलाइन खरीदे जाते हैं जबकि इससे ज्यादा की कीमत के आभूषण ऑनलाइन खरीदने का खतरा कोई मोल नहीं लेता है.

भारत मे हर वर्ष ८०० टन सोने की खपत होती है जिसमें से ६०० टन सोने का प्रयोग आभूषण बनाने में होता है. उद्योगों के समूह एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष २०१६ तक देश के घरेलू आभूषण का कुल कारोबार २६ अरब डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है. अमरीका और हांगकांग भारतीय आभूषणों के सबसे बड़े आयातक हैं. आभूषणों का बाजार २०१६ तक २ अरब पचास करोड़ तक पहुंच जाएगा.

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