आधुनिक लहंगे.

विवाह की सारी तैयारियां केंद्रित होती हैं वर वधू को ध्यान में रखकर, लेकिन जब बात श्रृंगार और सजने संवरने की होती है तो वर से ज्यादा वधू को तवज्ज़ो दी जाती है.स्त्री वैसे ही प्रकृति का खूबसूरत तोहफा है विवाह का अवसर वधू के जीवन काï सर्वाधिक महत्वपूर्ण अवसर होता है. इस दिन वह जीवन का सर्वोत्तम श्रृंगार और वेशभूषा धारण करना चाहती है. यही कारण है कि विवाह के समय दुल्हन के पहनने वाले वस्त्र और आभूषण बहुमूल्य और अनोखी खूबसूरती से सजे होते हैं. वर्षों से दुल्हन की वेशभूषा में साड़ी एवं लहंगा चुन्नी ने अपना स्थान बना रखा है.- चैताली, गरिमा.


आधुनिक  लहंगे.

वर्षों पूर्व लहंगे अर्थात घेरदार, गोटापट्टियों से सजा रंगीïन पेटीकोट नुमा वस्त्र होता था. समय के साथ इसके कपड़े से लेकर इस पर की गई कारीगरी और डिजाइन में कई बदलाव आïए हैं. आधुनिकता से भी लहंगा अछूता नहीं रहा है और इसके घेरदार कट बदलकर फिशकट में परिवर्तित हो चुके हैं. इनकी कारीगरी गोटे से शुरू होकर जरदोजी, कुंदन, स्टोन, कढ़ाई आदि तक का सफर तय कर चुकी है.

आधुनिक  लहंगे.
आधुनिक  लहंगे.


विवाह की सारी तैयारियां केंद्रित होती हैं वर वधू को ध्यान में रखकर, लेकिन जब बात श्रृंगार और सजने संवरने की होती है तो वर से ज्यादा वधू को तवज्ज़ो दी जाती है.स्त्री वैसे ही प्रकृति का खूबसूरत तोहफा है विवाह का अवसर वधू के जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अवसर होता है. इस दिन वह जीवन का सर्वोत्तम श्रृंगार और वेशभूषा धारण करना चाहती है. यही कारण है कि विवाह के समय दुल्हन के पहनने वाले वस्त्र और आभूषण बहुमूल्य और अनोखी खूबसूरती से सजे होते हैं. वर्षों से दुल्हन की वेशभूषा में साड़ी एवं लहंगा चुन्नी ने अपना स्थान बना रखा है. लहंगा चुन्नी का व्यवसाय आज वस्त्र उद्योग, का महत्वपूर्ण भाग है. इसमें मैन्यूफैक्चरर से लेकर लहेंगे के ऊपर कारीगरी करने वाले कारीगरों, डिजाइनर और सिलाई करने वाले तक शामिल हैं.


आधुनिक  लहंगे.
एक तरफ लहंगा चुन्नी बड़े शोरूम में उपलब्ध हैं तेा दूसरी तरफ घरों में भी महिलाएं इसे घरेलू उद्योग की तरह चला रही हैं.
लहंगे के वस्त्र में प्योर सिल्क एवं प्योर जार्जेट के साथ क्रैप भी लोकप्रिय हैं. आजकल क्रैप सिल्क का प्रयोग भी काफी बढ़ रहा है. प्योर सिल्क कारीगरी के पश्चात काफी महंगा हो जाता है. क्रैप सिल्क इसकी तुलना में सस्ता पड़ता है. नैट और वेलवेट के लहंगे भी चलन में हैं. नैट पर जरदोजी की कारीगरी बेहद खूबसूरत लगती है.
भागल स्थित जी-३ के चेतन भाई बताते हैं कि इनके यहां लहंगे चुन्नी के सैट की कीमत १८००० से शुरू होकर १५०००० तक की है. ज्यादातर ग्राहक सिल्क, नेट और वेलवेट पर गोटापट्टी, जयपुरी और एन्टिक वर्क की कारीगरी पसंद करते हैं. दुल्हन के लिए लाल या गुलाबी रंग ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं.

पारले पाइंट स्थित आसोपालव पर मध्यम रेंज की कीमत १५००० तक के भी लहंगे उपलब्ध हैं. सिल्क मैचिंग सेंटर के नसीम भाई बताते हैं कि दुल्हन के लहंगे में जरदोजी के साथ साथ कांच का डायमंड वर्क जिसे झरकंड के नाम से जानते हैं भी काफी प्रचलन में है साथ ही रेशम वर्क में वेलवेट के पैच भी लोग पसंद करते हैं. सूरत की टिवंकल और मीनल मोदी जो कि डॉली के नाम से घोड़दौड़ रोड पर बुटिक चलाती हैं बताती हैं क्रैप सिल्क, रियल सिल्क और वेलवेट पर हैंडवर्क वाले लहंगा चुन्नी ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं. इनके लहंगा चुन्नी ३००० से लेकर १०००० तक के मूल्य के होते हैं.


सूरत का घाघरा फेमस है जिस पर रेशम व जरी के साथ डायमंड का सिक्वेंस होता है ये २००० से लेकर २०००० तक में होता है.

भागल स्थित विवाह शोरूम के मालिक युसुफ कपाडिय़ा बताते हैं इस समय सबसे ज्यादा सिल्क के कपड़े को ही लहंगे में पसंद किया जा रहा है. लेकिन इसकी चुन्नी जार्जेट और नेट के साथ शिफॅान और वेलवैट में भी पसंद की जाती है. आजकल लाल और गुलाबी रंग के साथ साथ संतरी, रानी, कोरल, क्रॉस कलर, हरे रंग की भी काफी मांग है. लहंगे पर कोटा पट्टी वर्क के साथ कुंदन वर्क भी बहुत ज्यादा डिमांड में है कुछ लोग प्रिंटेड लहंगे भी पसंद करते हैं इसमें फ्लोरल प्रिंट की डिमांड ज्यादा है वे बताते हैं लहंगों की डिजाइन में काफी बदलाव आ चुका है आजकल घेरदार या अम्ब्रेला कट की जगह फिशकट, स्ट्रेट, वेस्टर्न कट फैशन में हैं.


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