अपनी परा़ई

काजल का मन बहुत ही खट्टा हो गया था. उसे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. तभी मनु ने कहा ,मां ये सवाल समझ नहीं आ रहा हैं, दो बार पूछने पर भी जब काजल ने कोई उत्तर नहीं दिया, तो रानु जोर सो बोली मां क्या सोच रही हो?

काजल की तंद्रा टूटी,

क्या हुआ?

अच्छा, तुम दोनों जाओ बाहर खेलो, रानू, मनू की पुस्तकें समेटते हुए वह बोली, दोनों बच्चे आश्चर्य से मां का मुंह ताकने लगे अभी तो वे पढऩे बैठे ही थे, फिर अचानक मां को क्या हुआ? जो तुरंत ही खेलने को कह दिया, वैसे तो जब तक होमवर्क समाप्त न हो जाए और वे दोनों 1-1 गिलास दूध न पी लें, मां घर से बाहर जाने ही नहीं देती.वे दोनों तुरंत ही खुशी से उछलते हुए बाहर निकल गए.


काजल ने गहरी सांस छोड़ी और उठ खड़ी हुई. अभिनव के आने का समय हो रहा था. उसने अपने बाल ठीक किए और शाम की चाय चढ़ाने रसोई में घुस गई. चाय छान ही रही थी कि अभिनव के स्कूटर का हॉर्न बजा वह तुरंत रसोई से बाहर निकलकर बरामदे से होती हुई दरवाजे पर आई, गेट खोल दिया अभिनव ने स्कूटर खड़ा करते हुए उसकी तरफ देखा. उसका उदास चेहरा पहचानने में अभिनव ने कोई गलती नहीं की. तुरंत पूछा क्या बात है? तबियत तो ठीक है तुम्हारी, हां, कुछ खास नहीं,कहते हुए काजल घर के अंदर की तरफ बढ़ गई. अभिनव हाथ मुंह धोकर ड्राइंग रुम में आ गया, तब तक काजल भी चाय और थोड़ी नमकीन ट्रे में लगाकर ले आई थी. तभी अंदर से मां-पिताजी भी आ गए, सब बातें करते हुए साथ-साथ चाय पीने लगे.

अभिनव ने काजल की तरफ देखते हुए क्या बात है? तुम कुछ परेशान लग रही हो? पिताजी तुरंत बोले, भई, हमने तो इसे कुछ कहा नहीं है.मां भी कहां चूकी, इसका मुंह ही ऐसा है बेटा, तू चाय पी, पूरे दिन का थका हुआ आया है. काजल का दिलभर आया. वह चुपचाप रसोई में आकर रात के खाने की तैयारी में लग गई. सबको गर्म-गर्म खाना खिलाकर, बाद में बच्चों को हाथ-मुंह धोने के लिए भेजकर, उन्हें नाइट सूट दिए. फिर रसोई साफकर सबके लिए दूध गर्म किया. साथ में सुबह के नाश्ते के लिए साबूदाना भिगो कर, सबको दूध उनके बिस्तर पर दिया, तब हाथ-मुंह धोकर अपने कमरे में आकर कपड़े बदले और बिस्तर पर लेट गई. रानू-मनू सो चुके थे. अभिनव सोने की तैयारी में थे, उन्होंने मुस्कुरा कर उसे गुडनाइट कहा और बोले सुबह जल्दी दफ्तर जाना है, इसलिए जल्दी सो जाता हूं. उसने भी मुस्कुरा कर गुडनाइट कहा और स्वयं भी सोने की कोशिश करने लगी पर नींद आंखों से कोसों दूर थी. आखिर फोन पर उसने अपनी सास को उसकी छोटी ननद शिप्रा से बात करते हुए सुन लिया था. वह बच्चों को पढ़ाने बिठाकर उनके लिए दूध करने रसोई घर की तरफ जा रही थी. तब उसने सास को कुछ अजीब ढंग से फुसफुसाते सुना, जिज्ञासा वश वह रुक गई. सास उसकी ननद से कह रही थी, कुछ करती नहीं है, सारा दिन बस ऐसे ही गुजार देती है, अभिनव भी बीवी का ही गुलाम है उसे भी हमारी फिक्र कहां? तू थी तो हमारा ख्याल करती थी, अब ये अपना खून तो है नहीं, पराए घर से आई पराई लड़की हमारी तकलीफ क्या समझेगी.

सुबह से शाम तक सिर्फ घर के कार्यों में ही लगी रहती है. सास-ससुर, पति-बच्चों बस यही उसकी दुनिया है, फिर भी शिकायत और यदि उन्हें कोई शिकायत है भी तो वे उसे न कहकर शिप्रा से क्यूं कह रही हैं. क्या शिप्रा यहां आकर उनकी सेवा कर देगी.

सोचते-सोचते उसे अपनी भाभी का ख्याल आ गया ,पिछली बार जब वह मायके गई थी तो भाभी दिन रात मां की सेवा में ली रहती थीं, वे नौकरी भी करतीं और घर का ख्याल भी रखतीं, पर मां थी कि उनकी शिकायतें खत्म ही नहीं होती. अचानक सोते-सोते ही उसने कुछ निश्चय किया और सो गई, सुबह उठने पर अभिनव से उसने कहा बच्चों की छुट्टियां हैं मैं थोड़े दिन के लिए मां के पास मायके जाना चाहती हूं. अभिनव ने कहा आज ही तत्काल में आरक्षण करवा दूंगा. तैयारी कर लो परसों चली जाना. दो दिन मायके जाने की तैयारी में कहां गुजर गए, काजल को पता ही नहीं चला. दोनों बच्चों के साथ जब मायके पहुंची रात के 2 बज रहे थे. बड़े भैया लेने स्टेशन आए हुए थे, कार में भैया से घर में सभी सदस्यों के हालचाल पूछ लिए, मां का मोतिया बिंद का ऑपरेशन हुआ था, पापा की शुगर की समस्या वैसी ही थी और उनकी मिठाई खाने के शौक पर नियंत्रण अभी भी नहीं था, घर पहुंचकर हाथ मुंह धोकर काजल आराम करने लेट गई. रानू, मनु आते ही सोने चले गए थे, काजल ने किसी को जगाना उचित नहीं समझा, सोचा सुबह सब से मिलूंगी. सुबह उठते ही वह कमरे से बाहर आई, सबकी आवाजें डाइनिंग रूम से आ रहीं थीं. वह सीधा वहीं पहुंच गई, बेटी को देखकर अम्मा की आवाज सातवें आसमान पर पहुंच गई.

भाभी रश्मि ने नाश्ते में चीला बनाया था. देख ले कालज, कितना मोटा चीला बनाया है तेरी भाभी ने? हमें तो पेट भरना है, कच्चा-पक्का जो मिले, वहीं चुपचाप खा लेती हूँ.

अम्मा, इतना तो नरम चीला है.. तो, आप मेरा वाला ले लो, देखो चटनी कितनी अच्छी बनी है. फिर उसने अम्मा की बात का असर भाभी पर से खत्म करने की लिए बोला वाह भाभी, मजा आ गया. अम्मा, आप इतनी जोर से क्यों बोल रही हैं अगर भाभी से कोई शिकायत है तो उन्हें धीरे आराम से भी तो कहा जा सकता है, जैसे आप मुझे कहती हैं. मुझे क्या इससे डर लगता है अरे, मैं तो जानबूझ कर जोर से बोलती हूं, सच बात में डर काहे का? मैं तो चाहती ह तेरा भाई भी ये सब सुने और अपनी बीवी को अपने कंट्रोल में रखे, अरे दबाकर रखेंगे तभी ठीक रहेगी, नहीं तो सिर पर चढ जाएगी.

अम्मा, आप तो न जाने कौन से जमाने में रहती हैं, बहु को बेटी की तरह ही प्यार की जरूरत हैं बल्कि बेटी से ज्यादा, वह आपके और भैया के लिए अपने माता-पिता, भाई-भाभी सभी को छोड़कर आई है, नए शहर, नए लोगों के बीच सिर्फ, आप लोगों के प्यार को पाने के लिए.ले अब तू भी ज्यादा बोलने लगी है, तुम सब क्या चाहते हो, मैं कुछ बोलुं न? रहने दे, मुझे मत सिखा, मैं तो जैसी हूं वैसी ही रहूंगी, ये मेरा घर है जिसे यहां रहना है वह मेरे तरीके से रहेगा. और बिटिया अब तुम्हें भी अपनी मां में कमी नजर आने लगी है. काजल अपनी अम्मा के गुस्से को जानती थी इसलिए चुप हो गई. वह भाभी का हाथ बंटाने रसोई में चली गई.

रश्मि के लिए कुछ नया नहीं था, वह जानती थी कि जब तक उसकी ननद काजल यहां रहेगी. अम्मा और काजल मिलकर उस पर न केवल तीर चलाते रहेंगे वरन उसमें और पति मनीष में मतभेद कराने का कोई अवसर नहीं छोड़ेंगे. शाम को मनीष ने कार्यालय से आकर सबके साथ घूमने जाने का कार्यक्रम बनाया. सब लोग बड़ा बाजार घूम कर आते हैं और लौटते में चाट भी खा आएंगे. रानू-मनु ,भैया के हम उम्र बच्चों कवि और अवि के साथ बहुत खुश थे, वे चारों ये सुनकर उछल पड़े. तभी पीछे से पिताजी की आवाज आई. मैं भी फटाफट तैयार हो जाता हूँ, अम्मा बोली, मैं भी कई दिनों से घर से निकली नहीं हूं, जरा घूम आती हूं, बिटिया तेरे साथ.सब तैयार होकर बाहर आ गए थे, भैया ने कार स्टार्ट की, काजल को भाभी नजर नहीं आईं. काजल ने भाभी को आवाज लगाई, तभी अम्मा बोल पड़ी, अरे हम लोग तो खाना घर पर ही खाएंगे, मैने ही उसे कहा है कि हम आएं तब तक खाना बनाकर रखे.

काजल हैरान रह गई, तुरंत अंदर गई और जबरदस्ती भाभी को तैयार करके अपने साथ बाहर ले आई फिर अम्मा से बोली, लौटकर मैं और भाभी दोनों मिलकर आपका और पापा का खाना फटाफट बना देंगे. अभी भाभी के बिना मुझे मजा नहीं आएगा. सभी आश्चर्य से उसका मुंह देखते रह गए, रश्मि के लिए भी अपनी ननद काजल का ये रूप नया था, अगले दिन सुबह से ही काजल-भाभी रश्मि के साथ काम में लग गई. जल्दी जल्दी काम निपटा कर वे दोनों तैयार हो गईं. आज भाभी, भैया ने छुट्टी ली थी वे दोनों चारों बच्चों को घर पर ही छोड़कर भैया के साथ बाजार चले गए.बाहर से जब शाम को हंसते खिलखिलाते तीनों घर लौटे तो अम्मा बोली, सारा बाजार ही खरीद लाई क्या?

कालज प्रसन्न मन से बोली- भैया-भाभी माने ही नहीं, तीन साडिय़ां तो मुझे ही दिला दीं और रानू, मनु के लिए भी जींस टी-शर्ट और अभिनव जी के लिए भी एक बढिय़ा टी शर्ट और अच्छे ब्रांड का चश्मा दिलवाया है, अम्मा तुरंत बोली, और महारानी जी अपने लिए क्या-क्या लाई है?

अम्मा इतना कहा पर भाभी ने अपने लिए कुछ भी नहीं खरीदा.अरे सब नाटक हैं, तेरे सामने दिखावा कर रही है. रात को सोते हुए अम्मा बोली काजल, जब मेरा शरीर चलता था तो मैं किसी पर निर्भर नहीं रहती थी, कवि से कबसे कह रहूं हूं मेरी अलमारी की साफ-सफाई कर दे पर वह सुनती ही नहीं, जरूर बहू ने मना कर दिया होगा, सिखा पढ़ा दिया होगा, आखिर बेटी तो उसी की है,अम्मा कल सुबह हम आपकी अलमारी की सफाई कर देंगे. आप छोटी-छोटी बातों के लिए परेशान मत हुआ करो, सब कुछ भाभी को सौंप दो, भाभी-भैया अच्छा कमा रहे हैं, भाभी आपका और पापा का भी पूरा ध्यान रखती हैं, आप उन्हें उनकी गृहस्थी उनके हिसाब से चलाने दो. तभी वहां लेटे पापा बोले, अरे तू क्या समझेगी, ये दोनों हमारी सेवा इस घर और गहनों के लालच में ही तो कर रहे हैं मैने तो कह दिया है सेवा करोगे तो हमारे मरने के बाद

ये मेवा तुम्हें मिल जाएगा, नहीं तो इसे हम अपनी बेटी को दे देंगे. काजल मां-पापा की बातें सुनकर दुख में डूब गई, यही हाल तो उसकी अपनी ससुराल में था. जो बहू अपने साथ है वह पराई है और जो बेटी दूसरी जगह है अपनी है. इसी मानसिकता के चलते आए दिन अपनी ससुराल में उसे अपमानित होना पड़ता हैं.

मन ही मन सोचा इनको समझाना बहुत कठिन हैं.सुबह उठते हुए भी वह अलसाई सी हो रही थी तभी कवि आई गले में बाहें डालकर बोली, बुआ मां ने आज आपके पसंद के समोसे बनाए हैं नाश्ते में ,चलो न. काजल, कवि को निहारती रह गई कितनी प्यारी बिटिया हैं भाभी की, बिल्कुल भाभी की तरह. सुबह का नाश्ता पानी निपट गया था, मनीष भैया कार्यालय चले गए थे, रश्मि रसोईघर में लगी थी-तभी काजल अम्मा के पास आई बोली चलो अम्मा, आपकी अलमारी की सफाई कर के ठीक से कर दूं.

अम्मा ने बड़े पर्स के अंदर रखे छोटे पर्स में से चाबी निकालकर काजल को दी. अलमारी खोलते ही काजल चौंक पड़ी. अम्मा ने गहनों को दो रुमालों में बांध रखा था. तुरंत उसके मुंह से निकला, अम्मा आप ये गहने घर में, अलमारी में क्यूँ रखे हुए हैं?। इन्हें बैंक में रख दो, वहां सुरक्षित रहेंगे.

अम्मा तुरंत बोली, अरे अब हम से बैंक नहीं आया जाया जाता है. तो भाभी को बोल दो वे कर देंगी. अरे तू पागल है क्या? ये गहने तो मैने मेरे और तेरे बच्चों के लिए रखे हैं, बहू अपने पति की कमाई के पहन लेगी. हां थोड़ा बहुत दे दूंगी उसे भी, पर आखिर खून का रिश्ता तो तुझसे है वह तो पराई है.

काजल गुस्से से फट पड़ी, अम्मा आप का तो दिमाग खराब हो गया है. जिस के साथ रह रही हैं जो आप के बेटे की पत्नी है, जिसके हाथ से बना खाना आप खाती हैं वो पराई है तो फिर मैं आपकी अपनी कैसे हो सकती हूं?

अम्मा ये गहने, घर इनमें से मुझे कुछ भी नहीं चाहिए, मेरे ससुराल से मुझे जो मिलेगा मैं उसमें खुश हूँ. ये सब भाभी का है आप उन्हें अपने हाथ से इन्हें दीजिए.

अम्मा, मेरी बात आप ध्यान से सुन लो यदि आप चाहती हैं कि मैं आप के पास आती रहूं तो आज आप को मेरी एक बात माननी ही होगी. आज और अभी रश्मि भाभी को अपनी अलमारी की चाबी सौंपनी होगी. तू मुझे धमकी दे रही है ,नहीं मां, ये तो मेरी अपनी आप बीती है जो कुछ मेरे साथ मेरे ससुराल में होता है और मुझे दुख होता है वह मैं अपनी भाभी के साथ नहीं होने दूंगी. वो सिर्फ नाम के लिए भाभी नहीं है हमारे परिवार का एक स्थायी आंगन हैं जहां हम जीवन भर आ सकते हैं वो हमारी वो बड़ी हैं जो हर हाल में हमें सिर्फ और सिर्फ खुशियां और आशीर्वाद ही देंगी. हमसे कभी कुछ लेंगी नहीं, मां मैं अपनी गलती समझ चुकी हूं आप भी समझ लें. यह कहकर काजल तेजी से कमरे से बाहर चली गई.

अम्मा की तो बोलती ही बंद हो गई थी, बेटी की बातें सच लग रही थी. आज उनकी ही बेटी ने उन्हें आइना दिखा दिया था. वे सोच में डूब गई, इतने र्दुव्यवहार के बाद भी, जी अम्माजी, कहने वाली बह का चेहरा आंखों के सामने आ खड़ा हुआ.

ड्रांइगरुम से बहू रश्मि काजल और बच्चों के हंसने बोलने की आवाजें आ रही थीं. उन्होंने कुछ सोचा और दृढ़ निश्चय किया. अभी देर नहीं हुई है, उनकी आंखों में निश्चय की अनोखी चमक थी, इतनी बातें सुनने के बाद पापा भी किंकर्तव्यविमुढ़ चुपचाप बैठे थे. दोनों पति-पत्नी ने एक दूसरे की आंखों में देखा और उठ खड़े हुए. पापा की छड़ी की खटखट सुनते ही बच्चे दौड़े आए, बाबा क्या बात है? आप आवाज दे देते हम आ जाते, कमरे में पड़े-पड़े उदास हो रहे थे तो सोचा चलें सब के साथ टीवी देखें, पापा बोले. अकेले देखने में कहां मजा आता है, अम्मा भी बोली आज सब्जी क्या बनाओगी बहू?

अम्माजी हरे चने की रसेदार सब्जी और गोभी आलू की सूखी सब्जी.अच्छा तो यहीं चाकू और प्लेट दे दे ,जितना हो सकेगा छील काट दूंगी. बाद में तू अपने तरीके से ठीक कर लेना, तूने तो काम कभी करने नहीं दिया ,तो आदत नहीं रही है.

रश्मि आश्चर्य चकित खड़ी थी. अम्मा ने फिर आवाज दी और सुन बहू ये अलमारी की चाबी तू रख, मेरे बस का नहीं है अब सार संभाल करना, तू जाने और तेरा काम. फिर काजल की तरफ मुंह करके बोली, बेटा नए पौधे को रोपने के लिए जमीन से पुराना पौधा हटाना पड़ता है, ये देर से समझ आया.काजल खुशी के आंसुओं में भीग चुकी थी. अम्मा के गले लगकर बोली अपना ससुराल न सही मेरे मायके में मेरे समझाने से खुशी आ गई, यही मेरी खुशी है.

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